Friday, May 28, 2010
किस्से
गप्पे हांके हुए सदियाँ बीत गयी ,
बतियातें हुए मानो अरसा हो गया ।
लम्हा लम्हा , करते हुए यूँ घंटे गुजर गए
जेब में यादो के झरोके में देखा
किस्सा अपनी कहानी बयां करने को तड़प रह था....
यादों के झरोके से एक किस्सा फिर निकला
बतियातें हुए मानो अरसा हो गया ।
लम्हा लम्हा , करते हुए यूँ घंटे गुजर गए
जेब में यादो के झरोके में देखा
किस्सा अपनी कहानी बयां करने को तड़प रह था....
यादों के झरोके से एक किस्सा फिर निकला
अदाकार
यूँ तो बहुत से अंदाज़ हैं।
कहने को, सबके अपने मिजाज़ हैं
ग़ज़लों की दुनिया में मोहब्त के शेर घुमते हैं !!! हा हा
और शेर वालें अक्सर नज़म वालियों पर निगाहें दो चार करते हैं!!
ये न कहना की इन नज्मों ने कभी दोहों पर डोरे नहीं डालें ।
वो थोड़े शर्मीले थे, हकला से गएँ,
उनकी आंखें थोड़ी गहरी थी उसमे मियां बस डूब ही गए
यूँ दिल सभी का धड़कता है
कोने में एक बच्चा थोडा छिपता छिपाता हैं
गर गुलज़ार कहते हैं दिल तो बच्चा हैं
तो ओ माय गोड व्हाट अ लाइन
हमने सीधे लिख दिया तो बोले
ये शायरी में कंगाली का दौर हैं !! हा हा
ग़ालिब ,मीर, दुष्यंत, अमृता , और गुलज़ार बड़े नाम हैं
अपनी छोटी दुकान छोटा पकवान हैं
कोशिश जारी हैं लिखने की
थोडा हुज़ूर गौर फरमाएं
क्योंकिं
आखिर हर लिखने वाला ... छोटा ही सही एक अदाकार हैं !!!!
Subscribe to:
Comments (Atom)