गप्पे हांके हुए सदियाँ बीत गयी ,
बतियातें हुए मानो अरसा हो गया ।
लम्हा लम्हा , करते हुए यूँ घंटे गुजर गए
जेब में यादो के झरोके में देखा
किस्सा अपनी कहानी बयां करने को तड़प रह था....
यादों के झरोके से एक किस्सा फिर निकला
Friday, May 28, 2010
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